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भवसागर से पार लगाती है भगवान शिव की आराधना-स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी

विक्की सैनी

हरिद्वार, 26 जुलाई। नीलधारा तट स्थित श्री दक्षिण काली मंदिर में यूपी के राज्यमंत्री सुनील भराला ने भगवान शिव का रूद्राभिषेक किया। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को कोरोना से मुक्ति व विश्वकल्याण की कामना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि संपूर्ण सावन अनवरत् चलने वाली शिवोपासना अवश्य ही जगत का उद्धार करेगी। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज के सानिध्य में गंगा तट पर भगवान शिव का पूजन अर्चन सौभाग्यशाली व्यक्ति को प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि संतों के जप तप से ही देश उन्नति की ओर अग्रसर होगा। भगवान शिव देवों के देव महादेव भक्तों की सभी आराधनाएं पूर्ण करते हैं। महादेव की कृपा से ही संपूर्ण विश्व में जल्द खुशहाली लौटेगी। श्री दक्षिण काली पीठाधीश्वर म.म.स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा श्रद्धा एवं विधानपूर्वक की गयी भगवान भोलेनाथ की पूजा व्यक्ति को भवसागर से पार लगाती है। भक्तों के जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर भगवान शिव लेकर जाते हैं और उनका कल्याण स्वयं भगवान शिव करते हैं। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि श्रावण में महादेव शिव देवी पार्वती के साथ कनखल स्थित दक्ष प्रजापति मंदिर में निवास कर सृष्टि का संचालन करते हैं। ऐसे में सौभाग्यशाली व्यक्ति को ही उनके दर्शन का लाभ प्राप्त होता है। भगवान शिव की पूजा से युग युगांतर के पापों का शमन हो जाता है और जीवन उन्नति की ओर अग्रसर होता है। इसलिए भगवान शिव के साथ मां भगवती की भी पूजा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री दक्षिण काली मंदिर में श्रावण मास के दौरान भक्तों को माई के दर्शन ओर कृपा के साथ साथ महादेव का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है और गंगा मां की असीम कृपा भी साधकों पर बरसती है। श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से वे बेहद प्रसन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन सावन मास में ही हुआ था। जब मंथन से विष निकला तो पूरे संसार की रक्षा करने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। विष से उनका कंठ नीला पड़ गया। जिससे वे नीलकंठ कहलाए। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि अपने कंठ में विष धारण कर संसार की रक्षा करने वाले भगवान शिव कोरोना महामारी से भी पूरे संसार की रक्षा करेंगे। भगवान शिव की कृपा से समस्त रोग दूर हो जाते हैं। दुर्घटना और अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। इस दौरान आचार्य पवनदत्त मिश्र, पंडित प्रमोद पाण्डे, स्वामी विवेकानंद ब्र्हम्मचारी, बालमुकुंदानंद ब्रह्मचारी, अंकुश शुक्ला, सागर ओझा, अनूप भारद्वाज, पंडित शिवकुमार शर्मा आदि मौजूद रहे।

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