विक्की सैनी
हरिद्वार।बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान को रातों-रात गुपचुप तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ विभागीय नियमों की गंभीर अनदेखी को उजागर किया है, बल्कि जिला खाद्य एवं पूर्ति विभाग की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सस्ते गल्ले की दुकान के ट्रांसफर में न तो ग्राम सभा का कोई प्रस्ताव बनाया गया, न ही सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति ली गई और न ही लाभार्थियों अथवा ग्रामवासियों को किसी प्रकार की सूचना दी गई। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया को सुनियोजित तरीके से रातों-रात अंजाम दिया गया, ताकि किसी को भनक तक न लग सके।
नियमों को किया दरकिनार
सरकारी नियमों के अनुसार सस्ते गल्ले की दुकान के आवंटन या ट्रांसफर से पहले ग्राम सभा का प्रस्ताव, विभागीय जांच और उच्च अधिकारियों की अनुमति अनिवार्य होती है। लेकिन इस मामले में इन सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना विभागीय मिलीभगत के ऐसा करना संभव ही नहीं।
DSO के संज्ञान में मामला, फिर भी कार्रवाई शून्य
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) को दे दी गई थी। इसके बावजूद अब तक न तो किसी प्रकार की जांच शुरू की गई और न ही किसी अधिकारी से जवाब-तलब किया गया। विभाग की यह चुप्पी संदेह को और गहरा कर रही है।
ग्रामवासियों और लाभार्थियों में भारी आक्रोश
सस्ते गल्ले पर निर्भर सैकड़ों लाभार्थियों और ग्रामीणों में इस गुपचुप ट्रांसफर को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह सीधे तौर पर गरीबों के हक पर डाका है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी कर दुकान का ट्रांसफर करना भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
क्या दबाया जा रहा है मामला?
विभागीय खामोशी अब कई सवाल खड़े कर रही है—
क्या जिला खाद्य एवं पूर्ति विभाग इस गड़बड़ी को दबाने की कोशिश कर रहा है?
क्या किसी बड़े घोटाले के उजागर होने का डर है?
और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई से बचने का प्रयास किया जा रहा है?
जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला आंदोलन का रूप ले सकता है।
फिलहाल बहादराबाद में सस्ते गल्ले की दुकान का यह संदिग्ध ट्रांसफर प्रशासन और विभाग दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन पारदर्शिता दिखाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दफन होकर रह जाता है।





