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हरिद्वार: दीपावली की रात अधिकारियों का तांडव, सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान का “गुपचुप ट्रांसफर”, पूर्ति विभाग सवालों के घेरे में

हरिद्वार। बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान को दीपावली की रात अचानक और गुपचुप तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। विभागीय नियमों को दरकिनार करते हुए हुई इस कार्रवाई ने जिला खाद्य एवं पूर्ति विभाग की कार्यशैली पर सवालों की बौछार कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, न ट्रांसफर के लिए कोई अनुमति ली गई, न ग्राम सभा का प्रस्ताव बनाया गया, और न ही लाभार्थियों को जानकारी दी गई। आरोप है कि विभागीय मिलीभगत से पूरी प्रक्रिया को रातों-रात अंजाम दिया गया।

*DSO के संज्ञान में आने के बाद भी कार्रवाई ठंडी*?

नए जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) को चार्ज संभालते ही इस पूरे मामले की शिकायत कर दी गई थी। लेकिन शिकायत मिलने के बाद भी अब तक न जांच शुरू हुई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी से जवाबदेही तय की गई है। विभाग की खामोशी इस विवाद को और गहरा कर रही है।

*दो अधिकारियों का हाल में हुआ ट्रांसफर—क्या दबाए जा रहे पुराने फैसले*?

जिला पूर्ति विभाग में हाल ही में दो अधिकारियों का विवादों के चलते ट्रांसफर हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नए अधिकारी पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि पूर्व अधिकारियों द्वारा किए गए संदिग्ध निर्णयों और फाइलों को दबाया जा सके। दीपावली की रात किया गया यह कथित “हड़बड़ी वाला ट्रांसफर” भी उसी खेल का हिस्सा माना जा रहा है।

*ग्रामवासियों में आक्रोश*

लाभार्थियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना प्रस्ताव, बिना अनुमति और बिना किसी आधिकारिक सूचना के दुकान का स्वामित्व बदलना सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है। लोगों ने आरोप लगाया कि विभागीय मिलीभगत के बिना ऐसी कार्रवाई संभव ही नहीं।

*जांच की मांग तेज, विभाग चुप*

फिलहाल जिला खाद्य एवं पूर्ति विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है—क्या विभाग इस गड़बड़ी को दबाने की कोशिश कर रहा है?क्या किसी बड़े खेल का पर्दाफाश होने का डर है?स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि जिम्मेदार अधिकारी सामने आ सकें और सस्ते गल्ले की व्यवस्था में पारदर्शिता वापस लाई जा सके।

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